पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/आंतरिक सुरक्षा
समाचार में
- हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीय जलक्षेत्र में उपग्रह संचार उपकरणों के अवैध उपयोग पर चिंता व्यक्त की है, इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बताया गया है।
परिचय
- डिजिटल कनेक्टिविटी के युग में, स्थलीय नेटवर्क (फाइबर ऑप्टिक्स, मोबाइल टावर) प्रायः कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता के कारण सीमित हो जाते हैं।
- उपग्रह-आधारित संचार (SATCOM) इन अंतरालों को समाप्त करने वाला महत्वपूर्ण अवसंरचना बनकर उभरा है।
- भारत जैसे विशाल और विविध राष्ट्र के लिए SATCOM केवल तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है, जो आपदा प्रबंधन, दूरस्थ कनेक्टिविटी, टेली-शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार प्रदान करता है।
उपग्रह-आधारित संचार क्या है?
- उपग्रह संचार पृथ्वी की कक्षा में स्थित कृत्रिम उपग्रहों का उपयोग करता है, जो रेडियो संकेतों को पृथ्वी के विभिन्न बिंदुओं के बीच प्रसारित करते हैं।
- उपग्रह “आकाश में दर्पण” की तरह कार्य करता है, जो एक पृथ्वी स्टेशन से संकेत प्राप्त करता है, उसे बढ़ाता है और दूसरे स्टेशन या उपयोगकर्ता टर्मिनल तक पुनः प्रसारित करता है।
कार्यप्रणाली
- अपलिंक: पृथ्वी स्टेशन उपग्रह तक संकेत भेजता है।
- ट्रांसपोंडिंग: उपग्रह संकेत प्राप्त करता है और उसका आवृत्ति परिवर्तन व प्रवर्धन करता है।
- डाउनलिंक: उपग्रह संकेत को पृथ्वी पर अपने “फुटप्रिंट” क्षेत्र में पुनः प्रसारित करता है।
- रिसेप्शन: पृथ्वी पर स्थित डिश (जैसे DTH एंटेना या VSAT टर्मिनल) संकेत को ग्रहण करते हैं।

भारत में उपग्रह-आधारित संचार की वर्तमान स्थिति
- भारत में 1 अरब से अधिक इंटरनेट ग्राहक हैं, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच सीमित है (लगभग 46 प्रति 100 व्यक्ति)।
- उपग्रह इंटरनेट को इस डिजिटल विभाजन को समाप्त करने के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
- सरकार ने उपग्रह इंटरनेट सेवाओं में 100% एफडीआई की अनुमति दी है, जिससे निजी भागीदारी संभव हुई है।
- भारत LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) और MEO (मीडियम अर्थ ऑर्बिट) उपग्रह प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है, जो पारंपरिक GEO उपग्रहों की तुलना में तीव्र और विश्वसनीय ब्रॉडबैंड प्रदान करते हैं।
- SpaceX (स्टारलिंक) और यूटेलसैट वनवेब(भारत की भारती एंटरप्राइजेज द्वारा समर्थित) जैसे वैश्विक खिलाड़ी भारतीय ब्रॉडबैंड बाज़ार में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत के लिए SATCOM के लाभ
- डिजिटल समावेशन: दूरस्थ गाँवों, सीमा क्षेत्रों और आपदा-प्रवण क्षेत्रों को जोड़ना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया के लिए सुरक्षित संचार।
- आर्थिक विकास: ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल वाणिज्य को समर्थन।
- रणनीतिक स्वायत्तता: स्वदेशी उपग्रह प्रणालियाँ विदेशी ऑपरेटरों पर निर्भरता कम करती हैं।
मुद्दे और चुनौतियाँ
- सुरक्षा चिंताएँ: भारतीय जलक्षेत्र में उपग्रह फोन का अवैध उपयोग निगरानी प्रणालियों को दरकिनार कर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करता है।
- उच्च लागत: उपग्रह इंटरनेट स्थलीय ब्रॉडबैंड की तुलना में महँगा है।
- नियामक बाधाएँ: लाइसेंसिंग, स्पेक्ट्रम आवंटन और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों के साथ समन्वय।
- तकनीकी सीमाएँ: मौसम व्यवधान, विलंबता समस्याएँ और ग्राउंड स्टेशन अवसंरचना।
- भूराजनीतिक निर्भरता: विदेशी LEO नक्षत्रों पर निर्भरता कूटनीतिक तनाव या संघर्ष के समय जोखिमपूर्ण हो सकती है।
सरकारी कदम
- सुरक्षा उपाय:
- शिपिंग महानिदेशालय (DGS) ने उपग्रह फोन और मैसेजिंग उपकरणों के अनधिकृत उपयोग पर कड़ी सज़ा का प्रस्ताव दिया है।
- इरिडियम आधारित उपकरण केवल आपातकालीन संचार हेतु अनुमत हैं, जबकि थुराया उपकरण प्रतिबंधित हैं।
- व्यक्तिगत उपकरणों को अधिकारियों द्वारा घोषित और सील किया जाना आवश्यक है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार:
- 2020 में सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु सुधार किए।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 ने गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को अंतरिक्ष गतिविधियों की पूरी मूल्य श्रृंखला में भागीदारी की अनुमति दी।
- ISRO निजी कंपनियों के साथ उपग्रह प्रक्षेपण और संचार पेलोड में साझेदारी कर रहा है।
- IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र):
- यह भारत में उपग्रह इंटरनेट सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- NGEs की गतिविधियों को प्रोत्साहित, अधिकृत और पर्यवेक्षण करता है।
- ISRO और NGEs के बीच सेतु का कार्य करता है, जिससे भारत के उपग्रह संसाधनों का उपयोग ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए संभव होता है।
Source :TH